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सामूहिक संवाद- विमर्श

04/03/2025 07:15:15





युवाओं की भूमिका एवं कुपोषण मुक्त गांव- दिनांक 21-12-2024, को अशोक नगर जिले के ग्राम पंचायत राजपुर में आशा पारस फॉर पीस एंड हारमनी फाउंडेशन, भारत द्वारा युवा समूह (पुरुष) के साथ प्रसार गतिविधि के अंतर्गत सामूहिक संवाद- विमर्श किया गया जिसका विषय “ युवाओं की भूमिका और कुपोषण मुक्त गांव” था। इस विषय पर संस्था के प्रबंधक द्वारा अपनी बात को रखते कुपोषण पर युवाओं से चर्चा की गई । संस्था की तरफ से उपस्थित कार्यकारी प्रबंधक श्री लव चावड़ीकर द्वारा समूह से चर्चा करते कुपोषण क्या है और इसको कैसे पहचाने तथा दूर किस प्रकार कर सकते हैं, कुपोषण किसको हो सकता है और इससे कैसे बचा जा सकता है आदि विषयों पर विस्तार से जानकारी साझा की । जागरूकता आधारित चर्चा को आगे बढ़ाते हुए   कुपोषण पर चर्चा की गई जिसमे कारण, लक्षण और बचाव पर चर्चा हुई - कुपोषण एक गंभीर स्थिति है जिसमें शरीर को आवश्यक पोषक तत्व, खनिज और कैलोरी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलते हैं। यह स्थिति विशेष रूप से बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक हो सकती है। कुपोषण के कारण शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा आ सकती है और विभिन्न बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। विमर्श में कुपोषण के कारणों, लक्षणों और बचाव पर विस्तार से चर्चा हुई - कुपोषण के कारण:  अपर्याप्त आहार: भोजन में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी।  गरीबी: आर्थिक स्थिति के कारण पौष्टिक भोजन का अभाव।  अज्ञानता: संतुलित आहार के महत्व के बारे में जानकारी का अभाव।  बीमारियाँ: कुछ बीमारियाँ भी कुपोषण का कारण बन सकती हैं। कुपोषण के लक्षण:  शारीरिक विकास में रुकावट: बच्चों में ऊंचाई और वजन का कम होना।  कमजोरी और थकान: ऊर्जा की कमी के कारण।  त्वचा और बालों की समस्याएं: त्वचा का पीला और बालों का गिरना।  प्रतिरक्षा प्रणाली में कमी: बीमारियों का अधिक खतरा। विमर्श में कुपोषण से बचाव हेतु निम्न सुझाब पर विस्तार से चर्चा हुई :  संतुलित आहार: प्रोटीन, विटामिन, खनिज और आवश्यक फैटी एसिड से भरपूर भोजन।  स्वच्छता: खाने-पीने की चीजों की स्वच्छता का ध्यान रखना।  नियमित स्वास्थ्य जांच: गर्भावस्था के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद।  स्तनपान: नवजात शिशु को कम से कम 6 महीने तक केवल माँ का दूध पिलाना। युवा समाज की रीढ़ होते हैं और उनकी भूमिका समाज में परिवर्तन लाने में बहुत महत्वपूर्ण होती है। कुपोषण मुक्त गांव बनाने में भी युवाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है अगर युवा अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए गांव के लिए समाज के लिए काम करें और समाज में निम्न प्रकार से कार्य कर सकते हैं - 1. जागरूकता फैलाना: युवा कुपोषण के बारे में जागरूकता फैला सकते हैं और लोगों को इसके प्रभावों के बारे में बता सकते हैं। 2. स्वास्थ्य शिक्षा: युवा स्वास्थ्य शिक्षा के बारे में जानकारी फैला सकते हैं और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के बारे में बता सकते हैं। 3. पोषण संबंधी जानकारी: युवा पोषण संबंधी जानकारी फैला सकते हैं और लोगों को संतुलित आहार के बारे में बता सकते हैं। 4. समुदाय की भागीदारी: युवा समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा दे सकते हैं और लोगों को कुपोषण मुक्त गांव बनाने में शामिल कर सकते हैं। कुपोषण मुक्त गांव बनाने के लिए युवाओं की रणनीति क्या हो सकती है - 1. गांव के बच्चों को पोषण संबंधी जानकारी देना: युवा गांव के बच्चों को पोषण संबंधी जानकारी दे सकते हैं और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली के बारे में बता सकते हैं। 2. गांव के लोगों को स्वास्थ्य शिक्षा देना: युवा गांव के लोगों को स्वास्थ्य शिक्षा दे सकते हैं और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली के बारे में बता सकते हैं। 3. गांव में पोषण संबंधी कार्यक्रम आयोजित करना: युवा गांव में पोषण संबंधी कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं और लोगों को पोषण संबंधी जानकारी दे सकते हैं। 4. गांव के लोगों को कुपोषण के प्रभावों के बारे में बताना: युवा गांव के लोगों को कुपोषण के प्रभावों के बारे में बता सकते हैं और उन्हें कुपोषण मुक्त गांव बनाने में शामिल कर सकते हैं। प्रश्न – संवाद के दौरान युवाओं द्वारा निम्न सवालों को पूछा गया जिनके उत्तर विस्तार से प्रदत्त किए गए – 1. हमें तो कुपोषण की पूरी जानकारी नहीं तो हम कैसे काम कर सकते हैं ? 2. हमें कुपोषण के लिए काम करने में कोई रोकेगा तो नहीं ? 3. इस विषय पर हम किन विभाग में जाकर जानकारी ले सकते हैं ? निष्कर्ष युवाओं की भूमिका कुपोषण मुक्त गांव बनाने में बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है। युवा जागरूकता फैलाने, स्वास्थ्य शिक्षा देने, पोषण संबंधी जानकारी देने और समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं। युवाओं को कुपोषण मुक्त गांव बनाने में शामिल करने से हम एक स्वस्थ और समृद्ध समाज बना सकते हैं। विमर्श में जागरूकता के लिए उक्त जानकारी प्रदान की गई साथ ही लोगों को बताया की ग्रामीण क्षेत्र में आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं एएनएम को कुपोषण के बारे में गहनता से जानकारी होती है आप उनका सहयोग कर लोगों को जागरूक करने में अपनी भूमिका को सामाजिक तौर पर निभा सकते हैं । उनको विभाग द्वारा इन विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण प्राप्त होता है।