Full Post

  • home
  • Pages
  • Full Post


स्व. श्री आनंदस्वरूप मिश्र स्मृति व्याख्यानमाला

13/04/2026 03:08:52





भोपाल, 13 अप्रैल 2026। आशा पारस फॉर पीस एंड हारमनी फाउंडेशन, भारत एवं केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर के संयुक्त तत्वावधान में स्व. श्री आनंदस्वरूप मिश्र स्मृति व्याख्यानमाला का प्रथम आयोजन “भारतीय ज्ञान परम्परा में सम्पूर्ण स्वास्थ्य की कल्पना एवं वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता” विषय पर विश्वविद्यालय के सभागार में गरिमामय रूप से सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय, राष्ट्रीय संगठन सचिव, आरोग्य भारती, भारत ने अपने प्रेरक वक्तव्य में भारतीय ज्ञान परम्परा (IKS) को समग्र स्वास्थ्य का मूल आधार बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक एवं आध्यात्मिक संतुलन भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने योग, आयुर्वेद एवं संतुलित दिनचर्या को स्वस्थ जीवन का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि भारतीय परम्पराएं व्यक्ति को रोगमुक्त ही नहीं, बल्कि संतुलित एवं दीर्घायु जीवन प्रदान करती हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारतीय जीवनशैली को अपनाकर स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन की दिशा में निरंतर प्रयास करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. हंसधर झा, निदेशक, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा की गई। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान एवं भविष्य के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं समाज को इन मूल्यों को अपनाकर स्वस्थ, संतुलित एवं समृद्ध जीवन की ओर अग्रसर होने का संदेश दिया। प्रो. आर. के. शुक्ला, पूर्व आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, PSSCIVE, NCERT (भारत सरकार), भोपाल एवं निदेशक, आशा पारस फॉर पीस एंड हारमनी फाउंडेशन, भारत द्वारा स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों, विद्वानों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत करते हुए संस्था की सामाजिक प्रतिबद्धताओं एवं कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रो. आशा शुक्ला, पूर्व कुलगुरु, एवं प्रबंध निदेशक, आशा पारस फॉर पीस एंड हारमनी फाउंडेशन, भारत द्वारा प्रस्तावना वक्तव्य में स्व. श्री आनंदस्वरूप मिश्र जी के प्रेरणादायी जीवन एवं उनके अतुलनीय कार्यों का स्मरण करते हुए उन्हें समाज एवं शिक्षा जगत के लिए एक आदर्श व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि स्व. मिश्र जी ने भारतीय ज्ञान परम्परा, नैतिक मूल्यों एवं समाज सेवा के क्षेत्र में इतना महत्वपूर्ण योगदान दिया, जो आज भी ग्रामीण विकास और हम सभी के लिए प्रेरक है। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा में निहित समग्र स्वास्थ्य की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक संतुलन का समन्वित रूप है तथा वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता कोविड के उपरांत अत्यधिक बढ़ गई है। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, सरस्वती पूजन, राष्ट्र गीत एवं विश्वविद्यालय कुल गीत के साथ हुआ, जिससे वातावरण अत्यंत प्रेरणादायी एवं आध्यात्मिक बन गया। कार्यक्रम में विद्वानों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय सहभागिता बडी संख्या में रही। हाइब्रिड में आयोजित इस कार्यक्रम में देश विदेश से विशिष्ट विद्वान जुड़े रहे । अंत में प्रो. श्रीगोविन्द पाण्डेय, सह-निदेशक एवं शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। राष्ट्र गान के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ ।